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Wednesday, 26 April 2017

बिचौलियों के हाथो लुटने को मजबूर हैं काश्तकार

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खटीमा में गेहूं क्रय केंद्रों पर बेचे गए अनाज का समय से भुगतान न होने के कारण काश्तकार अपने खून पसीने की गाढी कमाई का अनाज आढतियों व बिचैलियों को समर्थन मूल्य से कम में बेचने को मजबूर हैं। वहीं आढती व बिचैलिये उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर अपनी काली कमाई को सफेद करने के लिए काश्तकार को नगद भुगतान कर दोहरा फायदा उठाते हुए चांदी काट रहे हैं। एक ऐसा ही मामला प्रतापपुर निवासी दो भाई तरनजीत सिंह व बलविन्दर सिंह का प्रकाश में आया है। पीड़ित तरनजीत सिंह ने बताया कि वह दोनों भाई 22 एकड़ भूमि में खेती करते हैं। इससे पूर्व की फसल में उन्होने 6 ट्राली धान नवम्बर माह में सरकारी क्रय केन्द्र में तुलवायी थी। जिसमें से 4 ट्राली का भुगतान हो गया था लेकिन 2 ट्राली का भुगतान लगभग 2 लाख 92 हजार रूपये आज दिन तक नही हुआ है। जिस कारण गेहूं की फसल वह बिचैलियों व आढतियों को बेचने को मजबूर हैं। तो वहीं आढती भी मजबूरी का फायदा उठाते हुए समर्थन मूल्य से कम मूल्य में खरीदने के बावजूद उनको 6आर अथवा चेक के माध्यम से भुगतान करने को तैयार नही हैं। जिस कारण उनका 2 लाख 58 हजार रूपये का 1 नंबर का धन काला धन बनने की कगार पर है। इसी प्रकार पूर्व में आलू की फसल के समय उन्होने अपनी फसल मण्डी मे जाकर बेची जिसमें 2 आढतियों ने तो चेक व 6आर के माध्यम से भुगतान किया लेकिन एक आढती ने 93 हजार 930 रूपये का भुगतान नगद ही किया। जिस कारण क्षेत्र के काश्तकारों में राज्य सरकार की नीतियों प्रति आक्रोश पनप रहा है। उनका कहना है कि जहां सरकार एक ओर तो कहती है कि काष्तकार की फसल का उचित मूल्य दिलवायेंगे तो वहीं किसानों के आगे ऐसे हालात पैदा कर देती है कि उन्हे मजबूरन बिचैलियों के पास ही जाना पड़ता है।

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