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Sunday, 5 March 2017

रंगोक त्यार - भुवन विष्ट की कुमाउनी कविता

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( रंगों का त्यौहार).   
होली के रंग अबीर से,
आओ बांटें मन का प्यार,
खुशहाली आये जग में,
है आया रंगों का त्यौहार,
रंग भरी पिचकारी से अब,
धोयें राग द्वेष का मैल,
ऊंच नीच की हो न भावना,
उड़े अबीर है लाल गुलाल,
होली के हुड़दंग में भी,
बाँटे मानवता का प्यार,
खुशहाली आये जग में,
है आया रंगों का त्यौहार,
होली के रंग अबीर से,
आओ बाँटें मन का प्यार,
गुजिया मिठाई की मिठास से,
फैले खुशियों की बहार,
आओ रंगों की पिचकारी से,
धोयें जग का अत्याचार,
होली के रंग अबीर से,
आओ बाँटें मन का प्यार,
खुशहाली आये जग मे,
है आया रंगों का त्यौहार,
बसंत बहार के रंगों से,
ओढ़े धरती है पिताम्बरी,
ईष्या राग द्वेष को त्यागें,
सींचें मानवता की क्यारी,
रूठे श्याम को भी मनायें,
रंगों से खुशियां फैलायें,
झलक एकता की दिखलायें,
रंगों और पानी से सिखें,
चहुँ दिशा में मानवता दिखें,
बहे सुख समृद्धि की धार,
खुशहाली आये जग में,
है आया रंगों का त्यौहार,
होली के रंग अबीर से ,
आओ बाँटे मन का प्यार,

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