देवभूमि का मर्म

"खटीमा (उत्तराखंड) से प्रकाशित साप्ताहिक समाचार पत्र"

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Friday, 25 September 2020

दोहरी मार से क्यों बेहाल है अन्नदाता जानें 25 सितम्बर के अंक में

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Friday, 18 September 2020

खस्ताहाल सड़कें बनेंगी चुनावी मुद्दा ! जानें 18 सितम्बर के अंक में

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Tuesday, 15 September 2020

मोदी -शाह भी ड्रग्स मामले की चपेट में।आज होगी पूछताछ।

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ब्रेकिंग।
मोदी-शाह भी बॉलीवुड/ड्र्ग्स मामले के लपेटे में।

शुशांत सिंह राजपूत मौत को लेकर हो रही सी बी आई जांच में रिया चक्रवर्ती की गिरफ्तारी के बाद अब जांच की दिशा बदल चुकी है,पूरी जांच ड्रग्स तक सिमट गई है जिसमे नित नए नाम सामने आ रहे हैं। जिसमे नया नाम मोदी ,शाह का भी जुड़ गया है।

एन सी बी ने दोनों को भेजा समन। सुशांत सिंह राजपूत मामले में गिरफ्तार हुई रिया चक्रवर्ती के साथ व्हाट्सप चैट में इनका नाम आया था,ये व्हाट्सप चैट पहले डिलीट कर दी गई थी जिसे बाद में एजेंसियों द्वारा रिकवर किया गया है।जिसमे मोदी, शाह से रिया की ड्रग्स को लेकर चैट सामने आई है।इसी आधार पर नारकोटिक्स विभाग ने दोनों को पूछताछ के लिए समन जारी किया है।रिया की पूर्व मैनेजर रही श्रुति मोदी और उसकी दोस्त और टेलेन्ट मैनेजमेंट  में काम करने वाली जया शाह से आज पूछताछ हो सकती है।

Friday, 11 September 2020

Friday, 4 September 2020

कोरोना से हलकान क्षेत्रवासियों में अब दिमागी बुखार की दहशत

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Monday, 31 August 2020

कितने गहरे पानी में है उत्तराखंड में आम आदमी पार्टी ?

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 आप की संभावनाएं और चुनौतियाँ------------------------- दिनेश तिवारी (संपादक )



     यूँ तो उत्तराखंड  में आम आदमी पार्टी की सक्रियता बीते चार माह से ही बढ़ चुकी थी लेकिन पार्टी के 2022 में सभी70 सीटों पर चुनाव लड़ने के आधिकारिक ऐलान के बाद प्रदेश में राजनैतिक हलचल तेज हो गई है।प्रदेश की परिस्थितियों की बात करें तो राज्य गठन के 20 वर्षों में बारी बारी से भाजपा और कांग्रेस द्वारा शासन किये जाने के बावजूद प्रदेश की दशा व दिशा जस की तस है यहां तक कि कई मामलों में स्थिति संयुक्त उत्तर प्रदेश के समय से भी बदतर ही हुई हैं ऐसे में प्रदेश की जनता तीसरे विकल्प की ओर उम्मीद भरी निगाहों से देख रही है ,और दिल्ली में आम आदमी पार्टी द्वारा केंद्र से अपेक्षित सहयोग न मिलने के बावजूद बिजली पानी व परिवहन के साथ ही शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत आवश्यकताओं पर जो उल्लेखनीय कार्य किया है तथा विभिन्न सरकारी सेवाओं को बिना दफ्तरों के धक्के खाये घर घर तक पहुंचाने का कार्य किया है उससे ये पार्टी काफी संभावनाएं जगाती है,ये देश की इकलौती  ऐसी पार्टी है जो 5 साल शासन करने के बाद जनता से खुलकर कहती है कि यदि हमने काम नहीं किया है तो आप हमे वोट मत देना और इसके बावजूद प्रचंड बहुमत से फिर जीतकर आती है। ऐसे में समस्याओं से जूझते इस पहाड़ी प्रदेश की जनता पार्टी को दिल्ली की भांति यहाँ भी जनादेश दे दे तो आश्चर्य नही होना चाहिए।लेकिन इसके लिये यहाँ पार्टी के सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं अपेक्षाकृत नई पार्टी के सामने भाजपा और कांग्रेस जैसी पार्टियों  के जैसा विशाल संगठन करना सबसे बड़ी चुनौती है क्योंकि पार्टी  बेमन से ही सही लेकिन अपनी स्थापना वर्ष 2013 से ही प्रदेश में  पैर पसारने की कोशिशों के बावजूद पार्टी को इसमें अपेक्षित सफलता नही मिल सकी है।वहीं पार्टी का वन मैन आर्मी होना भी चिंताजनक है क्योंकि पार्टी की सारी राजनीति अरविंद केजरीवाल के इर्द गिर्द सिमटी है और उनके दिल्ली छोड़ने की दूर दूर तक कोई संभावना नही है ऐसे में प्रदेश का नेतृत्वकर्ता कौन सा चेहरा होगा तथा उसमे केजरीवाल जैसी चमत्कारिक क्षमता होगी ये कहना बहुत मुश्किल है।पार्टी का दिल्ली के बाहर का कमजोर प्रदर्शन भी इस बात की तस्दीक करता है क्योंकि पार्टी ने पंजाब,गोवा और हरियाणा में भी बहुत कोशिश की थी लेकिन कामयाबी नही हासिल कर सकी।ऐसे में उत्तराखंड के लिए पार्टी कौन सी अनोखी रणनीति अपनायेगी इस पर भी सवाल हैं।पार्टी के तीसरे विकल्प बनने की संभावना के चलते इस समय इससे जुड़ने वालों की होड़ तो लगी है लेकिन इनमें से अधिकांश वही हैं जो भाजपा और कांग्रेस की गोद में खेलकर ही यहाँ पहुंचे हैं ऐसे में इस पार्टी से जुड़कर उनकी मानसिकता और तौर तरीके बदल जायेंगे ये बात लोगों को समझाना भी पार्टी के लिए टेढ़ी खीर साबित होगा।प्रतिद्वंदियों की बात करें तो भाजपा की इस समय तूती बोल रही है ,प्रदेश सरकार के लचर कामकाज के चलते सत्ता प्रतिष्ठान विरोधी अवश्यम्भावी रुझानों के बावजूद पार्टी को कमतर नहीं आंका जा सकता,फिर ये नही भूलना चाहिए कि इस पार्टी के पास इस समय अपार संसाधनों के साथ ही  नरेंद्र मोदी के रूप में ऐसा ब्रह्मास्त्र है जो खाली नही जाता, ये और बात है कि दिल्ली चुनाव में इसी ब्रह्मास्त्र सहित सारे दांव पेंच अपनाने और पूरी ताकत झोंकने के बावजूद पार्टी आम आदमी पार्टी से बुरी तरह परास्त हुई है,और यही बात आप के आत्मविश्वास को भाजपा के सामने कई गुना बढ़ा देती है।कांग्रेस की बात करें तो दो बार सरकार बना चुकी यह पार्टी वर्तमान सरकार की नाकामियों के चलते राज्य की परंपरा अनुसार स्वाभाविक दावेदार तो है परंतु यह अपने ही अंतर्विरोधों से घिरी नजर आती है,पार्टी के पास सशक्त चेहरे के रूप में प्रदेश के सबसे बड़े जमीनी नेता पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत होने के बावजूद अंतर्कलह के कारण वे अभिमन्यु सरीखे ही नजर आते हैं ।इसके अतिरिक्त मध्यप्रदेश ,गोवा  ,कुछ हद तक राजस्थान और स्वयं उत्तराखंड में एक दर्जन मंत्री विधायक जिस तरह से पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए हैं उससे लोगों में ये विश्वास हो पाना मुश्किल है कि जिसे वे कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में जिताएंगे वह कल को भाजपा में शामिल नहीं होगा।यूकेडी तथा सपा व बसपा की बात करें तो ये पार्टियां प्रदेश में केवल उपस्थिति दर्ज करवाने तक सीमित हैं।इन तमाम परिस्थितियों के मद्देनजर आम आदमी पार्टी कौन सी रणनीति अख्तियार करती है और प्रदेश की राजनीति का ऊँट किस करवट बैठता है यह देखना दिलचस्प होगा,फिलहाल तीसरे विकल्प की तलाश में बैठे प्रदेशवासियों के लिए पार्टी ने उम्मीद तो जगा ही दी है।

Sunday, 30 August 2020

भाजपा के लिए बड़ी मुसीबत बनेगा खटीमा का तलवारबाजी प्रकरण !

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 शनिवार को एक कार्यक्रम में हुए विवाद के बाद भाजपा झनकट मंडल के पूर्व अध्यक्ष पर वर्तमान मंडल महामंत्री द्वारा जिस तरह से तलवार का हमला किया गया और पूर्व अध्यक्ष इसमे बाल बाल बचे,शुरू में इसे कार्यकर्ताओ का आपसी विवाद और क्षणिक आवेश का नतीजा माना जा रहा था।लेकिन रविवार को पूर्व मंडल अध्यक्ष द्वारा जिस तरह से बयान जारी करके नानकमत्ता विधायक पर इस मामले को लेकर आरोप लगाए गए और शाम को मामले के आरोपी मंडल महामंत्री की क्षेत्र पंचायत सदस्य पत्नी द्वारा वीडियो जारी कर खटीमा विधायक समेत कुछ भाजपा पदाधिकारियो पर आरोप लगाये गए इससे मामला गंभीर रूप लेता जा रहा है,जो कहीं न कहीं भाजपा की अंतर्कलह को भी उजागर करता है।ऐसे समय मे जब 2022 का विधानसभा चुनाव ज्यादा दूर नहीं है और सभी पार्टियां खुद की कमजोरियों को दूर करने की जद्दोजहद में जुट गई हैं भाजपा के लिए यह प्रकरण बड़ी परेशानी का कारण बन सकता है,विशेषकर पर्दे के पीछे से जिस तरह से कतिपय लोगों द्वारा मामले को लेकर दो समुदायों के बीच बैमन्यस्ता पैदा करने की कोशिश की जा रही है वह पार्टी के साथ ही समाज के लिए भी घातक हो सकता है।और यदि भाजपा नेतृत्व द्वारा मामले में त्वरित हस्तक्षेप नहीं किया गया तो यह प्रकरण आगामी चुनाव में पार्टी के लिए बड़े नुकसान का सबब भी बन सकता है।